MY DEAR STUDENTS AND TEACHERS - THIS BLOG IS A DIGITAL GIFT TO YOU ALL -SO LEARN LIFE SKILLS. IMPROVE READING, WRITING, LISTENING & SPEAKING SKILLS, WORK ON SCIENCE OR/AND SOCIAL SCIENCE PROJECTS. GIVE COMMENTS BY CLICKING - NO COMMENTS- BUTTON. USE SEARCH WINDOW FOR FASTER RESULTS. TALK TO YOUR LIBRARIAN ON ANY TOPIC, ANY TIME ANYWHERE: Mob: 8901549120."If you can't go out, go within." "Work on your intrapersonal communication to master your interpersonal communication" Gratitude and blessings are key to success of hard work

Thursday, 8 January 2026

स्वामी विवेकानन्द का दृष्टिकोण

 भूमिका

भारत के तेजस्वी संन्यासी स्वामी विवेकानन्द ने कहा था—“उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत।” उनके ये वचन आज भी पीढ़ी दर पीढ़ी गूँजते हैं। आधुनिक समय में जब स्वास्थ्य संकट, नशे की लत, करियर का दबाव और सांस्कृतिक क्षरण युवाओं को चुनौती देते हैं, विवेकानन्द के उपदेश उन्हें आध्यात्मिकता, नैतिकता और समाज व पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व में स्थिर करते हैं।

स्वास्थ्य और नशा

  • शारीरिक स्फूर्ति: स्वस्थ शरीर ही सशक्त मन का आधार है।

  • नशे का संकट: आत्मानुशासन और संयम ही सच्ची स्वतंत्रता है।

  • निवारक उपाय: संतुलित आहार, योग और ध्यान तनाव से बचाते हैं।

करियर और जीवन कौशल

  • उद्देश्यपूर्ण करियर: प्रतिभा राष्ट्रनिर्माण में लगनी चाहिए।

  • जीवन कौशल: संवाद, धैर्य और समस्या-समाधान आवश्यक हैं।

  • कौशल विकास: शिक्षा के साथ व्यावहारिक दक्षता भी जरूरी है।

आध्यात्मिकता और नैतिकता

  • आन्तरिक जागरण: ध्यान और आत्मचिंतन से स्पष्टता आती है।

  • सनातन धर्म: सत्य, करुणा और बड़ों का सम्मान शाश्वत मूल्य हैं।

  • सांस्कृतिक गौरव: परम्पराओं और साहित्य से जुड़ाव युवाओं को स्थिर करता है।

पर्यावरणीय उत्तरदायित्व

  • प्रकृति से सामंजस्य: नदियों, वनों और जीवों की रक्षा आध्यात्मिक साधना है।

  • युवा पहल: वृक्षारोपण और सतत जीवनशैली अपनाएँ।

  • नैतिक उपभोग: संयम और संसाधनों का सम्मान करें।

निष्कर्ष

स्वामी विवेकानन्द का दृष्टिकोण आज पहले से अधिक प्रासंगिक है। वे युवाओं को शरीर से बलवान, मन से निर्भीक, हृदय से करुणामय और कर्म से उत्तरदायी बनने की प्रेरणा देते हैं। स्वास्थ्य, करियर, आध्यात्मिकता, जीवन कौशल, सांस्कृतिक मूल्य, सनातन नैतिकता और पर्यावरणीय संरक्षण को अपनाकर भारतीय युवा उनके स्वप्न को साकार कर सकते हैं—“वे ही जीते हैं जो दूसरों के लिए जीते हैं।”

Bing Videos

No comments: