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Monday, 24 March 2025

श्रद्धांजलि, नमन शहीदों क़ो

 

शहीदी दिवस
देश में हर साल 23 मार्च शहीदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन हम उन लोगों को याद करते हैं, जिन्होंने हमारे देश को आजाद कराने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया था। इस दिन को विशेष रूप से महान क्रांतिकारी भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को श्रद्धांजलि देने के लिए भी याद किया जाता है, क्योंकि 23 मार्च, 1931 में इन महान क्रांतिकारियों को फांसी दी गई थी।

ये तीनों अद्भुत क्रांतिकारी विचारधारा को मानने वाले थे। फांसी लगने से कुछ समय पहले तक भगत सिंह एक मार्क्सवादी पुस्तक पढ़ रहे थे, सुखदेव कुछ गीत गुनगुना रहे थे और राजगुरु वेद मंत्रों का गान कर रहे थे। तीनों मित्रों की विचारधारा एक थी, इसलिए इनकी मित्रता बहुत घनिष्ठ थी। राजगुरु ने वाराणसी में विद्या के साथ-साथ संस्कृत भाषा का अच्छा ज्ञान प्राप्त किया था। वहीं रहते हुए धर्मग्रंथों तथा वेदों का अध्यन्न किया था। कौमुदी इन्हें पूर्ण रूप से कंठस्थ थी और वह छत्रपति शिवाजी के छापामार युद्ध शैली के बहुत प्रशंसक थे। वहीं सुखदेव को खतरों से खेलने की आदत हो गई थी। उनकी स्मरण शक्ति भी अद्भुत थी।

भगत सिंह को अपने पिता सरदार किशन सिंह तथा चाचा अजीत सिंह के स्वतंत्र विचार उन्हें बचपन से ही प्राप्त हो गए थे। पांच वर्ष की आयु में वह एक दिन अपने पिता जी के साथ खेत में गए तो वहाँ कुछ तिनके चुनकर जमीन में गाड़ने लगे। पिता जी ने हंसकर पूछा, "क्या कर रहे हो?" भगत सिंह ने उतर दिया, "मैं बंदूकें बो रहा हूँ, इनसे बहुत सी बंदूकें बन जाएगी और इनका प्रयोग अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ किया जायेगा।"

वर्ष 1928 में इन तीनों पर ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन सैंडर्स की हत्या का आरोप लगाया गया था। दरअसल उन्होंने उसे (सैंडर्स) ब्रिटिश पुलिस अधीक्षक जेम्स स्कॉट समझकर मारा था। वो स्कॉट ही था, जिसने लाठीचार्ज का आदेश दिया था। इसी लाठीचार्ज के कारण लाला लाजपत राय का निधन हो गया था। देश के लिए मर मिटने वालों का जब भी नाम लिया जाता है, तो उसमें सबसे ऊपर भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को याद किया जाता है। जिन्होंने बहुत कम उम्र में ही अपना जीवन देश के लिए न्यौछावर कर दिया था। जब अंग्रेजों का अत्याचार बढ़ रहा था, तब सबसे पहले लौहार में सैंडर्स की गोली मारकर हत्या की गई। उसके बाद 'पब्लिक सेफ्टी और ट्रेड डिस्ट्रीब्यूट बिल' के विरोध में भगत सिंह ने सेंट्रल असेंबली में बम फेंका था। हालांकि, उनका मकसद सिर्फ अंग्रेजों तक अपनी आवाज पहुँचाना था ना कि किसी को मारना। इस घटना के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। इस घटना को लेकर भगत सिंह ने कहा था, यदि बहरों को सुनना है तो आवाज को बहुत जोरदार होना होगा। जब हमने (असेंबली) बम गिराया था, तो हमारा उद्देश्य किसी को मारना नहीं था। हमने अंग्रेजी शासन पर बम गिराया था। अंग्रेजों को भारत छोड़ना चाहिए और उसे आजाद करना चाहिए।

ये तीनों शहीद क्रांतिकारी देश के युवाओं के लिए ना केवल उस समय बल्कि आज भी प्रेरणा स्त्रोत हैं। अंग्रेजी शासन से लोहा लेने वाले तीन महान क्रांतिकारी भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की याद में हर साल 23 मार्च को शहीदी दिवस के रूप में मनाया जाता है, ताकि उनके बलिदान को देश हमेशा याद रखे।
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नमस्कार!!!

*_शहीदी दिवस पर शहीदों को शत-शत नमन!!_*

ई-टेस्ट का लिंक:  

https://forms.gle/5DinBiUW6RLgULjK7

*_“HKCL ई-टेस्ट: शहीदों के सम्मान में एक पहल, सभी लर्नर्स तक पहुँचाएँ।”_*

धन्यवाद। 

*_हरियाणा नॉलेज कारपोरेशन लिमिटेड_*


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