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Thursday, 21 May 2026

शीर्षक : " यहाँ हिन्दी जन की भाषा है”

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1.हिन्दू मुस्लिम सिक्ख इसाई

भारत में सब भाई-भाई

जुड़े रहे सब एक सुत्र में  

ऐसी मेरी अभिलाषा है l


यहाँ हिन्दी जन की भाषा है

यहाँ हिन्दी जन की भाषा है.

 

२. अलग प्रान्त हैं अलग हैं बोली

पर हिन्दी, सबकी बड़ बोली

इस भारत माँ की हो हिंदी लौरी  

ऐसी मेरी अभिलाषा है l


यहाँ हिन्दी जन की भाषा है

यहाँ हिन्दी जन की भाषा है

 ३. राजनीति और धर्म को भूलो

बस! बस हिन्दी का दामन छू लो

कहना सुनना सरल हो जाये
ऐसी मेरी अभिलाषा है


यहाँ हिन्दी जन की भाषा है

यहाँ हिन्दी जन की भाषा है.

४.   अंग्रेजी से बैर नहीं है

ऊर्दू फारसी भी गैर नहीं है

पर परचम हिंदी का ही फैले

ऐसी मेरी अभिलाषा है


यहाँ हिन्दी जन की भाषा है

यहाँ हिन्दी जन की भाषा है.

उमाशंकर

लाइब्रेरियन

पी.एम.श्री के. वी. ओ .सी. ऍफ़.सेक्टर २९ चंडीगढ़ 

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